Astro yashi | Hindu God and Goddess
2024-04-09

पुरी के जगन्नाथ मंदिर के बारे में आप सभी लोगों ने जरूर सुना होगा क्योंकि ये हिंदुओं के चार धाम में से एक माना जाता है जो कि उड़ीसा के तटवर्ती शहर पूरी में स्थित है। यहाँ पर भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण को पूजा जाता है। यहाँ हर साल लाखों श्रद्धालु पूरी दुनिया भर से आते हैं और भगवान के दर्शन प्राप्त करते हैं। कहते हैं अगर आपने पूरी आकर भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर लिए तो आपकी जीवन की मुक्ति हो जाती है। यानी कि आप इस भवसागर से पार हो जाते हैं। इस मंदिर का इतिहास कई हज़ारों साल पुराना है। इस मंदिर के कई रहस्य व आश्चर्यजनक चमत्कार सभी वैज्ञानिको को भी हैरान कर देते हैं। लेकिन 1 दिन जगन्नाथ मंदिर में कुछ ऐसा हुआ। जिसने देश भर के बाकी सभी मंदिरों को हिला कर रख दिया ।
उड़ीसा के पुरी में स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर को लेकर एक ऐसी खबर आई जिसे सुनकर आपके भी रोंगटे खड़े हो जाएंगे। दरअसल यहाँ पर रोज़ लाखों करोड़ों का चढ़ावा चढ़ाया जाता है और इस चढ़ावे को एक बंद कमरे में रखा जाता है, जिसके ऊपर पुजारियों द्वारा ताला लगाया जाता है। लेकिन एक समय ऐसी घटना घटी I कि इस आंतरिक कक्ष की चाबी अचानक से कहीं पर खो गयी। मंदिर के पुजारियों ने मंदिर के कोने कोने में उस चाबी को ढूंढने का प्रयास किया लेकिन उन्हें वो चाबी कहीं भी नहीं मिली। अब धीरे धीरे ये बात बाहर फैलने लगी और पूरे पूरी शहर में ये बात फैल गई। की जगन्नाथ मंदिर के खजाने के कक्ष में लगे ताले की चाबी कहीं खो गई है। उसी रात्रि को सीमा परिहार नाम की एक लड़की जगन्नाथ मंदिर के दर्शन करने के लिए पहुंची थी।परंतु मंदिर की चाबी ना मिलने के कारण मंदिर को समय से पहले ही बंद कर दिया गया। लेकिन सीमा भगवान के दर्शन करना चाहती थी। इसलिए उसने पुजारियों से अनुरोध किया लेकिन किसी भी पुजारी ने उसको अंदर आने की अनुमति नहीं दी। और मंदिर के कपाट शाम को ही बंद कर दिए गए। सीमा को अगली सुबह अपने शहर के लिए निकलना था क्योंकि उसकी माँ की तबियत बहुत ज्यादा खराब थी। उसके पास केवल वही रात्रि थी जब मैं भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर सकती थी, लेकिन वह संभव नहीं लग रहा था तो वो भगवान जगन्नाथ की चौखट पर ही रात्रि में सो गई। तभी रात्रि 1:00 बजे एक ऐसा चमत्कार हुआ जिसे देखकर आपके भी होश उड़ जाएंगे। सीमा मंदिर की चौखट पर सोई हुई थी तभी अचानक से मंदिर के कपाट खुल गए। अंदर ही अंदर उसे अनुभूति होने लगी, मानो स्वयं भगवान जगन्नाथ उसे बुला रहे हो। एकदम से जब सीमा की आंखें खुली तो मंदिर के कपाट खुले हुए थे। इसलिए वो जल्द ही मंदिर के अंदर चली गयी , और भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के बहुत अच्छी तरह से दर्शन किए। यह घटना उसे एक सपने के सामान लग रही थी, तभी उसे अपने पैरों के पास एक भूरे रंग का लिफाफा प्राप्त हुआ और उस लिफाफे के ऊपर लिखा हुआ था रत्न (RATNA) भंडार की दूसरी चाबी। लेकिन सीमा को ये समझ में नहीं आ रहा था की आखिर ये चाबी किस कक्ष की है। अब सीमा मंदिर के अंदर उस दरवाजे को ढूंढने लगी, लेकिन मंदिर के अंदर तो कई सारे दरवाजे थे। तब उसे एक बहुत ही ज्यादा पौराणिक दरवाजा दिखाई दिया जब उसने उस चाबी को उस ताले में लगाया तब बहुत चमत्कारिक रूप से वो दरवाजा खुल गया और अंदर का नजारा देखकर सीमा के भी रोंगटे खड़े हो गए क्योंकि वो पूरा कमरा रत्न, हीरे, जवारात और करोड़ों रुपयों से भरा हुआ था। दरअसल ये सब भगवान जगन्नाथ का चढ़ावा था, जिसकी चाबी 2 दिन पहले गुम हो गई थी, लेकिन चमत्कारिक रूप से सीमा परिहार को ये चाबी एक बंद लिफाफे में प्राप्त हुई थी। सीमा चाहती तो उस खजाने को चोरी भी कर सकती थी क्योंकि उसकी माँ की तबियत बहुत ज्यादा खराब थी लेकिन वो भगवान जगन्नाथ की सच्ची भक्त थी। उसने उस दरवाजे को पहले के सामान लगाकर ताला लगा दिया। और उस दूसरी चाबी को पुनः उस बुरे रंग के लिफाफे के अंदर रखकर उसी मंदिर के एक खाली ड्रॉर के अंदर रख दिया। शायद भगवान जगन्नाथ उसकी परीक्षा ले रहे थे, जिसके बाद भगवान को प्रणाम करके वो मंदिर के बाहर लौट आई I तो मंदिर के कपाट पुनः अपने आप ही बंद हो गए। सुबह होते ही सीमा परिहार अपनी माता की तबियत जानने के लिए अपने शहर के लिए रवाना हो गई। जब पुजारियों ने मंदिर के कपाट खोले तो भगवान जगन्नाथ की पूजा अर्चना की गई और पुनः चाबी को ढूंढने का प्रयास शुरू हुआ। गौरतलब बात ये थी कि इस चाबी के खोने के बाद से काफी ज्यादा विवाद हो रहे थे और इस मामले में राजनीति भी की जाने लगी थी। यहाँ तक कि उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने न्यायिक जांच के लिए भी आदेश दिए थे और मंदिर के मुख्य प्रशासक और आई ए एस अधिकारी प्रदीप जैन का ट्रांसफर भी कर दिया गया था।
लेकिन अगले ही दिन चाबी की तलाश कर रहे चार पुलिस कर्मियों को भूरे रंग के उसी लिफाफे वो दूसरी चाबी प्राप्त हो गयी। सभी लोगो का कहना था की यह भगवान् जगन्नाथ का चमत्कार है। वही जब सीमा अपने शहर देरादून पहुंची तो वह बहुत ज्यादा उदास थी क्योकि इसे पता था की वो हॉस्पिटल का बिल नहीं भर पायेगी क्योकि उसके पास इतने पैसे नहीं थे तभी उसे पता लगा की एक अनजान व्यक्ति द्वारा उसका सारा बिल आलरेडी भर दिया गया है और अब उसकी माँ की तबियत भी बिलकुल सही थी जब उसने ये चमत्कार देखा तो उसके पेरो तले जमीन खिसक गयी क्योकि वो समझ चुकी थी की यह साक्षात भगवान् जगनाथ का ही चमतकार है और शायद यह सीमा की ईमानदारी का ही नतीजा था क्योकि पिछली रात्रि को वह रत्न बन्दर से पैसो को चुरा कर अपनी माता का इलाज करवा सकती थी लेकिन उसे भगवान् पर भरोसा था।
कहते है अगर आपको भगवान् जगनाथ पर भरोसा है तो आपकी कोई भी मनोकामना आदुरी नहीं रह सकती। इस मंदिर को सतयुग के राजा इंद्राद्यूमन ने बनवाया था। इस मंदिर का सबसे पहला प्रमाण महाभारत में मिलता है वर्तमान में जो मंदिर है उसे सातवीं सदी में बनवाया गया था और इस मंदिर की वास्तुकला बहुत ही बहेतरीन है और यहाँ बहुत से चमत्कार होते है । इन चमत्कारो का सबसे पहला उद्धरण जो हमें मिलता है, वो हे मंदिर के शिखर पर लहराता झंडा Iआपने सामान्य तोर पर हर मंदिरो में देखा होगा की जो ध्वजः होता है वो हवा की तरफ लहरता हैं लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी की जगनाथ मंदिर के शिखर पर जो ध्वजः लगा है वो हवा के विपरीत लहरता है और यह सिर्फ इस मंदिर में ही होता है पर सबसे बड़ा चमत्कार तो यह है की मंदिर के ऊपर गुम्बंद के आसपास आज तक कोई पक्षी उड़ता हुआ नहीं नज़र नहीं आया हैI इवन इसके ऊपर से कोई विमान भी नहीं उड़ता है । जगननाथ मंदिर में दुनिया की सबसे बड़ी रसोई है जहाँ पर 500 रसोइये एक साथ यहाँ पर प्रसाद बनाते है जो की लगभग 20 लाख भक्तो में बाटा जाता है इतना प्रसाद बने के बावजूद शाम तक सारा प्रसाद ख़त्म हो जाता है I और प्रसाद की एक भी मात्रा व्यर्थ नहीं जाती I
आपको यह जानकर हैरानी होगी की स्वम् हनुमान जी करते है भगवान् जगनाथ की समुन्द्र से रक्षा माना जाता है की तीन बार समुन्द्र ने जगनाथ मंदिर को तोड़ दिया था और कहते है की स्वम् जगनाथ भगवान् ने वीर हनुमान को यहाँ समुन्द्र को नियंत्रित करने के लिए नियुक्त किया था लेकिन जब जब हनुमान जी भगवान् जगनाथ के दर्शन करने के लिए जाते उनके पीछे पीछे समुन्द्र नगर में प्रवेश कर जाता और जगनाथ मंदिर को तोड़ देता उनकी इस आदत से परेशान होकर भगवान् जगनाथ ने हनुमान जी को सागर तटपर स्वर्ण भेड़ियों से बांड दिया और आज भी यहां हमें बेदी हनुमान मंदिर में हनुमानजी उन स्वर्ण बेड़ियों से बंदे दीखते है। जगन नाथ मंदिर में एक सींग द्वार है इस सींग द्वार के बहार हमें समुन्द्र की तेज ध्वनि सुनाई देती है लेकिन द्वार के अंदर जाते ही वो ध्वनि गायब हो जाती है और पुनः बहार आने पर फिरसे वो ध्वनि सुनाई देती है। इसी तरह इस मंदिर में के स्वर्ग द्वार भी है जहा पर मोक्ष की प्राप्ति के लिए यह शव जलाये जाते है I
तभी आपको वह जलने की गंध महसूस होती है पर जैसे ही आप स्वर्ग द्वार के अंदर जाते है वो गंध अपने आप गायब हो जाती है लेकिन देखने वाली बात तो तब होती है जब आशान का महीना आता है। आशान के महीने में भगवान् जगनाथ रथ पर सवार होकर अपनी मौसी गुडिचा के घर पर जाते है। यह यात्रा पांच किलोमीटर में फैली पुरुषोत्तम क्षेत्र में होती है। यहाँ रानी गुंडिचा भगवान् जगन नाथ के परम भसक्त इन्द्रद्युम्न की पत्नी थी इसलिए वह भगवान् जगनाथ की मौसी कहलाती है अपनी मौसी के घर भगवान् आठ दिन रहते है और आशान शुक्ल दशमी को वो वापस आ जाते है। भगवान् जगनाथ के रथ को नंदी घोष कहा जाता है और भाई बलभद्र के रथ को तालध्वजा कहा जाता है और बेहेन सुभद्रा के रथ को दर्पदलन कहा जाता है।
CONCLUSION
यह भी आश्चर्य की बात है KI मंदिर के ऊपर स्तापित ध्वजः को पुजारी द्वारा हर दिन चढ़कर के बदला जाता है I यह ध्वजः इतना भव्य है की जब यह लहराता है तो देखने वाले भक्तो की भीड़ जमा हो जाती है क्योकि जगनाथ का ध्वजः हवा से उलटी दिशा में लहराता है लेकिन अगर गलती से भी पुजारिओं द्वारा एक दिन भी ध्वज नहीं बदला जाये तो ये अगले 12 सालो के लिए यह मंदिर बंद हो जायेगा I यह परंपरा इस मंदिर में पिछले 1200 वर्षो से है। जगननाथ मंदिर अपने आप में ही कई रहस्य और चमत्कार समेटे हुए है I
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